क्या आप भी उम्र से पहले बच्चों को भेज रहे हैं स्कूल?



इन दिनों हमारे देश में प्ले स्कूल और प्रेपरेटरी स्कूल का चलन इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि पैरंट्स भी इन सबके झांसे में आकर बच्चे को उम्र से पहले स्कूल भेजना शुरू कर देते हैं और यही उनकी पैरेंटिंग से जुड़ी सबसे बड़ी गलती होती है। आजकल बच्चा 2 साल का हुआ नहीं कि उसे प्ले स्कूल भेज देते हैं। 3 साल की उम्र में नर्सरी, 4 में केजी और 5 में क्लास 1। कई बार तो महज 4 साल की उम्र का बच्चा भी क्लास 1 में पहुंच जाता है।

क्लास 1 में पढ़ने वाले बच्चे की उम्र होनी चाहिए 6 साल
दरअसल, राइट टू एजुकेशन ऐक्ट 2009 के मुताबिक क्लास 1 यानी पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे की उम्र किसी भी कीमत पर 6 साल से कम नहीं होनी चाहिए। लेकिन इंडियन पैरेंट्स में अपने बच्चों को स्कूल भेजने की ऐसी होड़ मची रहती है कि कई बार महज 4 साल का बच्चा भी क्लास 1 में पहुंच जाता है। ये प्रैक्टिस सिर्फ शहरों में ही देखने को नहीं मिल रही बल्कि गांवों में भी ऐसा हो रहा है। ऐनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (ASER) 2019 की मानें तो ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाले हर 5 में से 1 बच्चा, 6 साल की उम्र से पहले ही क्लास 1 में पहुंच जाता है।

उम्र कम हो तो बच्चे की ज्ञान संबंधी स्किल्स होती हैं प्रभावित
रिपोर्ट्स की मानें तो अगर बच्चे की उम्र अधिक है तो चीजों को सीखने और समझने की उसकी संज्ञानात्मक स्किल्स बेहतर होती है उन बच्चों की तुलना में जो कम उम्र में ही क्लास 1 में पहुंच जाते हैं। खासकर अक्षरों और नंबरों को पहचानने, पढ़ने और याद रखने की क्षमता। रिपोर्ट में यह बात भी बतायी गई है कि जब बहुत कम उम्र के बच्चों को फॉर्मल स्कूल में इनरॉल करा दिया जाता है तो ये भी एक बहुत बड़ी वजह बन जाती है कि वे अपनी पूरी स्कूल लाइफ में अकैडमिक्स के मामले में दूसरे बच्चों से पीछे रह जाते हैं।

यूके में 5 और यूएस में 6 है फॉर्मल स्कूल एज
बाकी दुनिया के देशों की बात करें तो यूके में फॉर्मल स्कूलिंग शुरू करने की न्यूनतम उम्र 5 साल है जबकी यूएस यानी अमेरिका में 6 साल। आपको बता दें कि फॉर्मल स्कूलिंग के तहत ही प्लेस्कूल और किंडरगार्डन में बताए गए साल भी काउंट होते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो यूके और यूएस दोनों जगहों पर बच्चों को किंडरगार्डन में ऐडमिशन कराने के लिए भी 5 या 6 साल का होना जरूरी है। स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी की मानें तो अगर बच्चों को थोड़े अधिक उम्र में स्कूल में इनरॉल कराया जाता है तो इससे उनकी अकैडमिक अचीवमेंट बेहतर होती है और क्राइम तरफ रुचि भी घटती है।

क्या आप भी उम्र से पहले भेज रहे बच्चे को स्कूल?
ASER की रिपोर्ट इस बात को भी हाइलाइट करती है कि कम उम्र में बच्चों को स्कूल भेजने का खामियाजा ये है कि फिलहाल क्लास 1 में पढ़ने वाले 41 प्रतिशत बच्चे सिर्फ नंबर 9 तक ही पहचान पाते हैं। जबकी NCERT की मानें तो क्लास 1 के बच्चों को 99 नंबर तक पहचानना चाहिए। अब आप ही सोचिए कि आप बच्चे को कम उम्र में स्कूल भेजकर उसका भला कर रहे हैं या बुरा?



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