तनाव बढ़ाने के साथ खुदकुशी के तरीके भी बता रहा Social Media


सूइसाइड को बढ़ावा दे रहा सोशल मीडियासूइसाइड को बढ़ावा दे रहा सोशल मीडिया

नई दिल्ली

छोटे-बड़े हर उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया जिंदगी का हिस्सा बन गया है। लेकिन दूर बैठे लोगों से कम्यूनिकेट करने का यह माध्यम अब सूइसाइड को बढ़ावा देने में भी पीछे नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया खुदकुशी को दोहरे स्तर पर बढ़ा रहा है। पहली वजह ये है कि सोशल मीडिया की वजह से लोगों का तनाव काफी बढ़ जाता है जिससे लोग आत्महत्या के बारे में सोचने लगते हैं। दूसरा यह कि लोग यहीं से सूइसाइड के नए-नए तरीके ढूंढते हैं। फिर उन तरीकों का इस्तेमाल अपनी जान देने में करते हैं।

खुदकुशी की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की जरूरत

एम्स के डॉक्टर का कहना है कि हमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल और इससे पैदा होनेवाली खुदकुशी की प्रवृत्ति के रोकथाम पर काम करने की जरूरत है। सूइसाइड को रोकने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के तौर पर करने की जरूरत है, ताकि समय पर ऐसे लोगों के बारे में पता कर सकें। उनकी काउंसलिंग करके उनकी जान बचा सकें। एम्स के फोरेंसिक विभाग के डॉक्टर चितरंजन बेहरा ने बताया कि देश की 1 लाख आबादी में 10 लोग सूइसाइड करते हैं।

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सोशल मीडिया की लत स्ट्रेस में धकेल रही

दिल्ली की बात करें तो अकेले एम्स में हर साल औसतन 500 से 600 सूइसाइड के मामले आते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे चिंता की बात यह है कि अधिकांश सूइसाइड के मामले 20 से 40 साल की उम्र के लोग होते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया इसका बहुत बड़ा कारण बनता जा रहा है। इसकी लत लोगों को स्ट्रेस में धकेल देता है। इसलिए हमें सोशल मीडिया की वजह से बढ़ते सूइसाइड के मामलों को रोकने पर काम करना होगा। डॉक्टर बेहरा ने कहा कि हमारे पास खुदकुशी को रोकने के लिए कोई प्लान नहीं है। जबकि चीन के बाद पूरे विश्व में सबसे ज्यादा सूइसाइड भारत में होता है। पहले लोग जहर का इस्तेमाल करते थे। अब ज्यादातर मामले में फांसी लगा लेते हैं। इसके अलावा भी कई नए-नए तरीके खुदकुशी के लिए अपनाए जा रहे हैं।

डिजिटल सूइसाइड नोट को पढ़ना होगा

डॉक्टर चितरंजन बेहरा ने बताया कि सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने वाले लोग जब स्ट्रेस का शिकार होते हैं तो वो सबसे पहले यहीं पर अपने मन की बात करते हैं। अचानक उनका अपडेट पहले की तुलना में बदला नजर आता है। ऐसे लोगों का ट्विटर पर अपडेट, फेसबुक पर कमेंट्स एक तरह से इलेक्ट्रॉनिक सूइसाइड नोट की तरह है। लोग अपनी तकलीफ यहां पर शेयर करते हैं। लेकिन अभी हम और आप इस पर कुछ नहीं कर पाते हैं। यहां ऐसे आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की जरूरत है, जो सोशल मीडिया पर नजर रखे और तुरंत ऐक्टिव हो, ताकि ऐसे लोगों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग की जा सके।

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परिवार में अगर किसी ने सूइसाइड किया है तो

डॉक्टर चितरंजन बेहरा ने कहा कि कई प्रकार की स्टडी चल रही है, जिसमें एक जेनेटिक रिसर्च भी है। एक ही वातावरण, एक ही जीने के तरीके, एक ही तरह की आर्थिक स्थिति के बावजूद एक शख्स सूइसाइड कर लेता है, दूसरा नहीं करता। कहीं न कहीं बढ़ता तनाव इंसान के अंदर बायोलॉजिकल बदलाव पैदा कर देता है। इसलिए हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि परिवार में अगर किसी ने सूइसाइड किया है तो उसके आगे की पीढ़ी में सूइसाइड करने की प्रवृत्ति कितनी है। उन्होंने कहा कि लगभग 40 पर्सेंट तक खतरा है कि उनकी आगे की पीढ़ी में भी सूइसाइड की प्रवृत्ति हो।

केस स्टडी 1

12 साल की एक बच्ची टीवी पर एक सीरियल अक्सर देखती थी। यह उसके रूटीन में शामिल था। एक दिन उसने सीरियल में देखा कि एक प्रेमी जोड़ा है, जो सूइसाइड कर लेता है और उन दोनों का पुनर्जन्म हो जाता है। बच्ची इससे इतनी प्रभावित हो गई कि उसने पुनर्जन्म को सही मान लिया और खुद सूइसाइड कर लिया।

​बहुत रहस्यमय है यह ‘सूइसाइड फॉरेस्ट’, जानें अनसुनी बातें

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    जापान का ऐकिगहारा जंगल है तो बहुत सुंदर लेकिन जानलेवा भी है। यहां बड़ी संख्या में आकर लोग आत्महत्या करते हैं जिस वजह से इसे सूइसाइड फॉरेस्ट यानी आत्महत्या का जंगल के नाम से भी जानते हैं। यह जंगल जापान के फूजी पर्वत की तराई में 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। आइए आज इसके बारे में कुछ रोचक बातें जानते हैं…

  • ​जाकर वापस लौटना मुश्किल

    फूजी पर्वत की तराई में स्थित ऐकिगहारा में पेड़ों का जाल है। जंगल काफी घना है और पथरीली जमीन है। मिट्टी इतनी घनी और टाइट है कि उसमें खुदाई भी नहीं हो सकती। पेड़ इतने घने हैं कि वहां सूरज की रोशनी तक नहीं पहुंचती। मिट्टी में लोहा के अवसाद जमा होने की वजह से जीपीएस और सेल फोन भी काम नहीं करते। ऐसे में वहां जाकर खो जाना आम सी बात है। (फोटो: साभार Pinterest)

  • ​कोई जानवर नहीं पाया जाता

    जंगल काफी घना है और जानवरों के लिए कुछ खाने-पीने को भी नहीं है। इस वजह से वहां कोई भी जानवर नहीं पाया जाता। जंगल को घना होने की वजह से पक्षियां भी नहीं होतीं।

  • सबसे ज्यादा आत्महत्या के मामले में दूसरे नंबर पर

    अपने पेड़ों और बर्फीली गुफाओं के लिए प्रसिद्ध ऐकिगहारा आत्महत्या के लिए बदनाम है। अनुमान है कि दुनिया में यह दूसरा स्थान है जहां खुदकुशी के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। पहले नंबर पर गोल्डन गेट ब्रिज है। ऐसा माना जाता है कि हर साल करीब 100 लोग इस जंगल में आत्महत्या करते हैं। (फोटो: साभार Pinterest)

  • ​प्रेत का साया

    जापान की लोककथाओं में कहा जाता है कि जंगल में भूत-प्रेत का साया है। वहां भूत-प्रेत को यूरे के नाम से जाना जाता है। कथाओं के मुताबिक, भूत पीली महिला के शक्ल में होते हैं जिसने सफेद गाउन पहन रखा होता है और उसके लम्बे-लम्बे काले बाल होते हैं। ऐसा माना जाता है कि आत्महत्या करने वाले लोगों की आत्मा अपने पूर्वजों की आत्माओं के साथ नहीं रह सकती हैं, इसलिए ये आत्माएं जंगल में इकट्ठा हो जाती हैं। (फोटो: साभार Pinterest)

  • किंवदंती

    जापान में इसके बारे में एक किंवदंती मशहूर है। इसके मुताबिक, जब सूखे के समय भोजन का संकट होता था तो लोगों को अपने परिवार द्वारा जंगल में छोड़ दिया जाता था। मरने के लिए छोड़े जाने वालों में ज्यादातर महिलाएं होती थीं। कुछ दिनों के बाद वे भूख से मर जाते थे। कहा जाता है कि उसके बाद उनलोगों की आत्मा पेड़ों पर रहती और घने जंगल में इधर से उधर घूमती।(फोटो: साभार आयरिश टाइम्स)

  • यूं दुनिया की नजर में आया

    वैसे ऐकिगहारा में लोग दशकों से आत्महत्या कर रहे हैं। लेकिन इसके बारे में 1950 में पता चला। 1960 में सीचो मात्सुमोतो नाम के एक लेखक ने कुरोइ काइजु (ब्लैक सी ऑफ ट्रीज) के नाम से एक उपन्यास लिखा। उपन्यास का अंत जंगल में दो प्रेमियों की आत्महत्या के साथ होता है। उसके बाद जंगल में आत्महत्या को लेकर चर्चे होने शुरू हो गए। उसके बाद 1993 में एक और चर्चित किताब आई जिसका नाम था The Complete Suicide Manual। इसमें जंगल को मरने के लिए उपयुक्त स्थान बताया गया है। कई मामलों में तो आत्महत्या पीड़ितों के करीब और उनके इस्तेमाल की चीजों के साथ यह किताब भी पाई गई है। इस किताब के आने के बाद यह जंगल सुइसाइड फॉरेस्ट यानी आत्महत्या के जंगल के नाम से मशहूर हो गया। साल 2018 की शुरुआत में यूट्यूब स्टार लॉगन पॉल ने इस स्थान को अपने विडियो में दिखाया था। विडियो में आत्महत्या की एक पीड़ित को दिखाया गया था जिसके चेहरे को ब्लर किया गया था। इस विडियो को लेकर विवाद हो गया था जिससे यह जंगल एक बार फिर से चर्चा में आया। (फोटो: साभार Pinterest)



केस स्टडी 2


12 साल का बच्चा हमेशा मोबाइल पर बिजी रहता था। उसके पैरंट्स को उसकी यह आदत बहुत बुरी लगती थी। एक दिन उसके पैरंट्स ने मोबाइल छीन लिया तो बच्चे ने गुस्से में आकर सूइसाइड कर लिया।

सूइसाइड का बढ़ता ग्राफ

– एम्स में हर साल औसतन 1700 से 1800 मामले पोस्टमार्टम के लिए आते हैं, जिसमें से एक तिहाई मामले सूइसाइड के होते हैं

– अभी भी अधिकांश सूइसाइड के मामले घरेलू हैं, जिसमें इपल्सिव (आवेग में आकर) लोग सूइसाइड कर लेते हैं

– संकेत हैं कि जिनके परिवार में सूइसाइड हुए हैं, उनके आगे की पीढ़ी में इसका 40 पर्सेंट खतरा है



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