स्कूल बैग के बोझ और स्मार्टफोन से बच्चों में मांसपेशी और हड्डियों का दर्द


स्कूल बैग और स्मार्टफोन बच्चों को दे रहा दर्दस्कूल बैग और स्मार्टफोन बच्चों को दे रहा दर्द

नई दिल्ली

एम्स की स्टडी में यह पता चला है कि स्कूल बैग का बोझ बच्चों की मांसपेशियों और हड्डियों को कमजोर बनाता है। सरकारी स्कूलों के 63 फीसदी बच्चे मांसपेशियों और हड्डियों के दर्द के शिकार पाए गए। स्टडी में इसकी सबसे बड़ी वजह बच्चों के भारी स्कूल बैग को बताया गया। स्टडी करने वाले डॉक्टर का कहना है कि देर तक टीवी देखने और स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से भी बच्चों में हड्डियों में दर्द की समस्या देखी जा रही है। एम्स के रूमेटेलॉजी विभाग ने अप्रैल 2018 से मार्च 2019 के बीच यह स्टडी की।

10 स्कूलों के 1600 बच्चों पर की गई स्टडी

एम्स की रूमेटोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ उमा कुमार ने कहा कि साउथ दिल्ली के 10 स्कूलों के 1600 बच्चों पर यह स्टडी की गई थी। 10 से 19 साल के बच्चों को इसमें शामिल किया गया था। स्टडी के दौरान 63 पर्सेंट बच्चे दर्द से पीड़ित मिले। 32 पर्सेंट बच्चे कमर दर्द से पीड़ित थे। इनमें से ज्यादातर बच्चों को 1 साल से अधिक समय से इस प्रकार का दर्द था। स्टडी में यह भी पाया गया कि जो बच्चे ज्यादा भारी स्कूल बैग उठाते हैं, वे दर्द से ज्यादा पीड़ित पाए गए। दर्द से पीड़ित बच्चों की संख्या उन बच्चों से दोगुनी थी, जिनके बैग का वजन कम था।

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खानपान ठीक नहीं होने से भी हड्डियों का दर्द

डॉ. उमा कुमार ने कहा कि बच्चों का खानपान ठीक नहीं होना भी मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द का करण बनता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पौष्टिक आहार देना चाहिए। डॉ. उमा ने कहा कि स्टडी में जो बच्चे रोजाना एक घंटे से कम शारीरिक काम कर रहे थे, रोजाना दो घंटा और हफ्ते में पांच दिन से अधिक स्मार्टफोन का इस्तेमाल और टीवी देख रहे थे, उनमें मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द का कारण यह हो सकता है। देर तक एक ही स्थिति में बैठकर टीवी देखने और स्मार्टफोन इस्तेमाल करने से मांसपेशियों और हड्डियों पर असर पड़ता है।

प्रदूषण से गठिया रोग

प्रदूषण की वजह से गठिया की बीमारी हो सकती है। एम्स की स्टडी में यह बात सामने आई है। दिल्ली में पिछले 10 या इससे अधिक सालों से रह रहे 350 स्वस्थ मरीजों पर यह स्टडी की गई थी। स्टडी में प्रदूषण की वजह से 20 फीसदी लोगों में गठिया जैसी बीमारी के तत्व बढ़े पाए गए। डॉ. उमा कुमार ने कहा कि प्रदूषण से गठिया जैसे रोगों के संबंधों को और पुख्ता करने के लिए उन्होंने दिल्ली में पिछले 10 सालों से रह रहे 18 से 60 साल की उम्र के 350 स्वस्थ लोगों के ब्लड सैंपल लिए थे। इसमें 20 फीसदी लोगों में पॉजिटिव एंटीबॉडी मिले जिनकी वजह से गठिया जैसी बीमारियां होती हैं।

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    पूरी दुनिया में करोड़ों लोग ऑर्थराइटिस यानी गठिया की समस्या से परेशान हैं। इसमें मरीज को काफी दर्द होता है साथ ही चलने-फिरने में भी दिक्कत आती है। अच्छी बात यह है कि कुछ फूड्स हैं जो आपके जोड़ों पर सकारात्मक असर डाल सकते हैं।

  • ऑलिव ऑइल

    रोजाना 2 से 3 चम्मच जैतून का तेल खाने में लेने से गठिया का दर्द कम हो सकता है। बेहतर होगा कम से कम रिफाइंड हो तो ज्यादा फायदा होगा, इसके लिए एक्स्ट्रा वरजिन तेल चुनें। इसे खाना बनाने और सैलड ड्रेसिंग में इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • सिट्रस फ्रूट्स

    चकोतरा या मौसमी, संतरे, नीबूं जैसे सिट्रस फ्रूट जिनमें विटमिन सी की मात्रा ज्यादा होती है उन्हें खाना शुरू कर दें। कोशिश करें ज्यादा से ज्यादा सब्जियां और फल खाएं।

  • यॉगर्ट

    फर्मंटेड फूड और यॉगर्ट आपकी आहारनाल के लिए अच्छे रहेंगे और सूजन में भी फायदा पहुंचाएंगे। इनसे ऑर्थराइटिस के लक्षण कम होते हैं।

  • ग्रीन टी

    एक कप ग्रीन टी पॉलिफिनॉल्स, पोषण से भरपूर होती हैं। गठिया के मरीजों के लिए यह काफी अच्छी होती है। इसमें भरपूर मात्रा में ऐंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं।

  • दलिया

    कलेस्ट्रॉल कम करने का सबसे अच्छा जरिया ओट्स हैं और ये आपके गठिया के दर्द में भी राहत पहुंचाते हैं। सुबह नाश्ते में दलिया भी काफी फायदेमंद ऑप्शन है।

  • हल्दी

    अल्टरनेटिव मेडिसिन रिव्यू की एक स्टडी में यह बात सामने आई कि ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीज अगर हल्दी का सप्लिमेंट लें तो उनको दर्द में राहत और चलने-फिरने में आसानी होती है। अदरक, दालचीनी और लाल मिर्च भी काफी फायदेमंद होती है।

  • होलग्रेन ब्रेड

    होलग्रेन खून में CRP-C रिऐक्टिव प्रोटीन की मात्रा खून में कम करता है। इसका संबंध डायबीटीज और दिल की बीमारी से भी है। इसलिए होल ग्रेन ब्रेड आपकी ओवरऑल हेल्थ के लिए अच्छा है।

  • लहसुन

    लंदन के किंग्स कॉलेज की रिसर्च के मुताबिक लहसुन की पर्याप्त मात्रा खाने से आर्थराइटिस का खतरा कम हो जाता है। प्याज भी इसमें काफी फायदेमंद होता है।

  • मांसाहार

    रुमेटॉयड आर्थराइटिस से पीड़ित लोगों में एनीमिया की शिकायत देखने को मिलती है। इसलिए अगर मीट से परहेज नहीं है तो रेग्युलर डायट में शामिल करें ताकि थकान और वीकनेस न लगे। आर्थराइटिस से पीड़ित मरीजों को अपनी डायट में पर्याप्त मात्रा में आयरन लेना चाहिए।

  • ट्राउट

    ट्राउट मछली ओमेगा 3 का सबसे अच्छा स्त्रोत है, यह इन्फ्लेमेशन को कम करता है। ऑइली फिश गठिया के दर्द में राहत देती हैं।



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