National Pollution Control Day: पलूशन को कंट्रोल करने के साथ-साथ ऐसे करें बचाव


नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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हर साल 2 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रदूषण रोकथाम दिवस यानी नैशनल पलूशन कंट्रोल डे मनाया जाता है। इसका मुख्य मकसद लोगों में हवा से लेकर पानी, मिट्टी और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रति जागरुकता फैलाना है। लेकिन इस नैशनल पलूशन कंट्रोल डे का भोपाल गैस त्रासदी से खास कनेक्शन है। इसे इस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की याद में मनाया जाता है।

वायु प्रदूषण आज एक बड़ी समस्या बन गया है। पूरे दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता बिगड़ गई है। प्रदूषण के लिए कई तत्व जिम्मेदार हैं जिनमें बम ब्लास्ट से लेकर पटाखे जलाना, पराली जलाना, सड़कों पर दौड़ते वाहन और फैक्टरियों व कारखानों से लीक होने वाली गैस व धुआं आदि। स्थिति दिनोंदिन विकराल रूप ले रही है, इसलिए जरूरी है कि प्रदूषण से बचाव के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं।

सबसे पहले तो प्रदूषण को नियंत्रित करने की कोशिश करें। इसके लिए:

1- लोगों को जागरुक किया जाए। उन्हें बताया जाए कि वे अच्छी क्वॉलिटी के मास्क का प्रयोग करें। खुले में कूड़ा, फसल के अवशेष, पॉलीथीन व अन्य प्लास्टिक कचरा न जलाएं।

2- कोयले का प्रयोग बिल्कुल भी न करें। इससे 40 फीसदी से भी अधिक कार्बन व फ्लाई ऐश निकलती है।

3- समय-समय पर वाहनों की मरम्मत कराते रहें। अच्छी क्वॉलिटी का डीजल और पेट्रोल इस्तेमाल करें।

4- वाहनों को पलूशन भी चेक करवाएं। फैक्टरियों में चिमनी की ऊंचाई 20 मीटर से कम न रखें।

पलूशन की वजह से आंखों में जलन, ऐसे करें दूरपलूशन की वजह से आंखों में जलन, ऐसे करें दूर

प्रदूषण से बचने के तरीके

इस जानलेवा प्रदूषण को कंट्रोल करने के अलावा बचाव करना भी बहुत जरूरी है। इसके लिए:

1- बाहर ही नहीं बल्कि घर के अंदर भी मास्क लगाकर रखें क्योंकि हवा में घुले जहरीले तत्व सांस के जरिए फेफड़ों व शरीर के अन्य अंगों में प्रवेश कर जाते हैं और वहां चिपक जाते हैं। इससे सांस संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

2- प्रदूषित हवा में सांस लेने से जहरीले तत्व शरीर के अंदर खून में जाकर मिल जाते हैं जिससे ब्लड इंफेक्शन के साथ-साथ दिल से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं।

फेफड़ों को नुकसान पहुंचने से बचाएं

  • फेफड़ों को नुकसान पहुंचने से बचाएं

    दिल्ली-एनसीआर में हुई हल्की बारिश भी प्रदूषण को पूरी तरह से साफ नहीं कर पायी। दिल्ली और आसपास के शहरों का AQI अब भी 300 के आसपास बना हुआ है। चारों तरफ धुंध और स्मॉग की परत छायी हुई है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों को आंखों में जलन, गले में दर्द और सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही है। यह जहरीली हवा हमारे फेफड़ों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कैसे छोटे-छोटे कदम उठाकर आप अपने फेफड़ों को साफ रख सकते हैं…

  • ​लंग्स को डिटॉक्स करना है जरूरी

    हालांकि लंग्स यानी फेफड़े सेल्फ-क्लेन्सिंग होते हैं यानी कि वे अपनी सफाई खुद कर सकते हैं। लेकिन अगर हर दिन हमारे लंग्स लगातार प्रदूषण वाली जहरीली हवा के संपर्क में आएं तो लंग्स में कंजेशन और जलन की समस्या हो सकती है जिस वजह से आपको हेवीनेस महसूस होता है। प्रदूषित हवा में मौजूद धूल के कण, केमिकल्स, जहरीली हवा, स्मोक आदि ऐसी चीजें हैं जो कई लंग्स में जाकर जमा हो जाती हैं। लिहाजा नैचरल तरीके से लंग्स को डिटॉक्स करना भी बेहद जरूरी है।

  • ​स्टीम थेरपी आएगी आपके काम

    अपने लंग्स यानी फेफड़ों की सफाई के लिए स्टीम थेरपी सबसे बेस्ट है। स्टीम को सांस के माध्यम से अंदर लेने पर एयर पैसेज यानी सांस की नली खुल जाती है और फेफड़ों में जमा म्यूकस भी बाहर आता है। सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है और पलूशन और स्मॉग की दिक्कत इस वक्त ज्यादा रहती है लिहाजा हर दिन स्टीम थेरपी का इस्तेमाल करें ताकि आपके फेफड़े, कंजेशन से मुक्त रहें।

  • ​ग्रीन टी का सेवन करें

    इसमें कोई शक नहीं ग्रीन टी हमारी सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है। वेट लॉस, बेहतर पाचन के साथ-साथ लंग्स को क्लीन करने में भी मदद कर सकती है ग्रीन टी। ऐंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर ग्रीन टी फेफड़ों में होने वाले जलन और खुजली की समस्या को दूर कर लंग्स के नाजुक टिशूज को बचाने का भी काम करती है। साउथ कोरिया के 1 हजार वयस्कों पर हुई एक स्टडी के मुताबिक जिन लोगों ने हर दिन 2 कप ग्रीन टी पी उनका लंग फंक्शन ग्रीन टी न पीने वालों की तुलना नें ज्यादा बेहतर था।

  • ​खानपान का रखें ध्यान

    खाने-पीने की भी ऐसी कई चीजें हैं जो हमारे एयर पैसेज को क्लीन कर सांस लेने में होने वाली दिक्कत को दूर कर सकती हैं। जैसे- हल्दी, चेरीज, ऑलिव, अखरोट, बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां- ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें खाने से हमारे फेफड़े नैचरल तरीके से क्लीन रहेंगे। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं।

  • ​शहद भी है मददगार

    ऐंटीऑक्सिडेंट और ऐंटी-इन्फ्लेमेट्री प्रॉपर्टी से भरपूर शहद भी लंग कंजेशन को दूर करने में मददगार है। अस्थमा, टीबी, गले में इंफेक्शन समेत सांस से जुड़ी कई बीमारियों को ठीक करने और फेफड़ों को राहत पहुंचाने में मददगार साबित हो सकता है शहद। हर दिन 1 चम्मच कच्चे शहद का सेवन, फेफड़ों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • ​इन बातों का भी रखें ध्यान

    घर के बाहर के पलूशन को आप कंट्रोल नहीं कर सकते लेकिन घर के अंदर की हवा को साफ रखना आपके हाथों में है। लिहाजा इन बातों का ध्यान रखें…- एक अच्छा एयर प्योरिफायर खरीदें जो घर के अंदर की हवा को साफ रखेगा।- घर को साफ रखें। कार्पेट, शेल्फ, किताबें आदि चीजों पर धूल को जमा न होने दें।- आप चाहें तो प्योरिफायर की जगह हवा शुद्ध करने वाले इंडोर प्लांट्स जैसे- ऐलोवेरा, बांस का पौधा, पीस लीली, स्पाइडर प्लांट आदि भी लगा सकते हैं।

3- प्रदूषण के चलते गले में सबसे अधिक धूल के कण जमा हो जाते हैं। इससे गले में परेशानी हो जाती है। ऐसे में रोज खाने के बाद गुड़ का इस्तेमाल करें। इसके अलावा मुलेठी भी चबा सकते हैं।

4- प्रदूषण में मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक के लिए बाहर न निकलें और एक्सर्साइज भी घर पर ही करें।

5- कभी भी खाली पेट सुबह की सैर पर न जाएं, कुछ न कुछ जरूर खा लें। इसके अलावा सुबह पार्क में घूमने तभी निकलें जब ओस पड़ी हो। ओस प्रदूषण की एक परत खत्म कर देती है।



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