व्‍यभिचार पर SC के फैसले का महिला आयोग अध्‍यक्ष ने किया स्‍वागत, कहा- 'अंग्रेजों के जमाने का था कानून'


नई दिल्‍ली : सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को भारतीय दंड संहित की धारा 497 (अडल्‍टरी) को असंवैधानिक करार देने के फैसले का राष्‍ट्रीय महिला आयोग की अध्‍यक्ष रेखा शर्मा ने स्‍वागत किया है. उन्‍होंने इस बड़े फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा ‘मैं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्‍वागत करती हूं. यह एक काफी पुराना कानून था, जिसे बहुत पहले ही हटा देना चाहिए था.’ उन्‍होंने कहा कि यह ब्रिटिश शासन या अंग्रेजों के जमाने का कानून था. हालांकि अंग्रेज इस कानून से लंबे समय पहले ही दूर हो गए थे लेकिन हम अभी तक इससे जुड़े थे.

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गुरुवार को व्यभिचार यानि अडल्टरी (धारा 497) पर दंडात्मक कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया. पत्नी अगर पति की बजाय किसी दूसरे पुरुष से अवैध संबंध बनाए तो उस पर भी पुरूष की तरह IPC की धारा 497 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा या नहीं, इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इस धारा को मनमाना और असंवैधानिक बताते हुए इसे गलत ठहराते हुए खारिज कर दिया.

पीठ ने कहा कि चीन, जापान और ब्राजील में व्‍यभिचार अपराध नहीं है. व्यभिचार अपराध नहीं, लेकिन तलाक़ का आधार हो सकता है.

व्यभिचार अपराध नहीं हो सकता- चीफ जस्टिस
पांच जजों की संवैधानिक बेंच में सबसे पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा व जस्टिस खानविलकर ने अपना संयुक्त फैसला सुनाते हुए आईपीसी की धारा 497 के उस प्रावधान को रद्द कर दिया, जिसके तहत व्यभिचार में केवल पुरुष को सजा दिए जाने का प्रावधान है. चीफ जस्टिस और जस्टिस खानविलकर ने कहा कि व्यभिचार अपराध नहीं हो सकता. दोनों न्‍यायाधीशों ने कहा, 497 IPC कानून मनमाना है, सही नहीं है.

SC का बड़ा फैसला, व्'€à¤¯à¤­à¤¿à¤šà¤¾à¤° अब अपराध नहीं, धारा 497 खारिज, CJI बोले- पत्'€à¤¨à¥€ का मालिक नहीं है पति

पति पत्नी का मालिक नहीं है- SC
चीफ जस्टिस ने फैसले में कहा कि पति पत्नी का मालिक नहीं है. महिला की गरिमा सबसे ऊपर है. महिला के सम्‍मान के खिलाफ आचरण गलत है. महिला और पुरुषों के अधिकार समान है. वहीं, तीसरे जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने भी इस कानून को ग़लत बताया, लिहाजा बहुमत से में ये कानून खारिज करने का फैसला सुनाया गया.

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